Wednesday, 12 March 2014

रक्त कैंसर के लिए चिकित्सा

- यदि आप भारत में कहीं भी बच्चों को भीख मांगते देखते हैं । तो कृपया संपर्क करें - RED SOCIETY  ये उन बच्चों की पढाई में मदद करेंगे - 9940217816 पर ।
- हैंडिकैप्ड/शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा और नि:शुल्क छात्रावास । संपर्क - 9842062501 और 9894067506.
- अगर किसी को आग दुर्घटना या उनके कान में समस्याओं के साथ पैदा हुए लोगों की नाक और मुंह मुफ्त प्लास्टिक सर्जरी Kodaikanal PASAM अस्पताल द्वारा किया जाता है । सब कुछ मुफ्त है । संपर्क - 045420-240668,245732
Helping Hands are Better than Praying Lips

- यदि आपको ड्राइविंग लाइसेंस की तरह किसी भी महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे राशन कार्ड, पासपोर्ट, बैंक पासबुक आदि कहीं सडक पर पड़े मिलें । तो डाक बक्से में डाल दें । भारतीय पोस्ट द्वारा उसके मालिक के पास पहुंचा दिया जाएगा ।
- बच्चों ( 0-10 वर्ष ) के लिए मुफ्त हार्ट सर्जरी Sri Valli Baba Institute Banglore बंगलौर । संपर्क करें - 9916737471
- रक्त कैंसर के लिए चिकित्सा । Imitinef Mercilet  एक दवा है । जो रक्त कैंसर के इलाज के लिए है Adyar Cancer Institute in Chennai में यह दवा मुफ्त उपलब्ध है । Create Awareness. It might help someone.

Adyar Cancer Institute in Chennai ( श्रेणी - कैंसर )
East Canal Bank Road, Gandhi Nagar, Adyar . Chennai -  600020
Landmark - Near Michael School
Phone - 044-24910754 044-24910754 , 044-24911526 044-24911526 , 044-22350241 044-22350241
आपसे विनती है । अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी/समारोह हो । और खाना बच जाये । या बेकार जा रहा हो । तो बिना झिझके आप 1098 ( केवल भारत में ) पर फ़ोन करें । बचा खाना अनाथ जरूरतमन्द बच्चों को पहुंचाया जायेगा ।
- यदि आपको रक्त की जरूरत है । तो इस वेबसाइट पर जाएं । आपको रक्तदाताओं का पता मिल जाएगा ।
कृपया इस संदेश को प्रसारित करने में मदद करें ।
www.friendstosupport.org
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उमर के साथ साथ किरदार बदलता रहा ।
शख्सियत औरत ही रही । प्यार बदलता रहा ।
बेटी, बहिन, बीबी, माँ, ना जाने क्या क्या ।
चेहरा औरत का दहर । हर बार बदलता रहा ।
हालात ख्वादिनों के न सदी कोई बदल पाई । 
बस सदियाँ गुज़रती रहीं । संसार बदलता रहा ।
प्यार, चाहत, इश्क, राहत, माशूक और हयात । 
मायने एक ही रहे । मर्द बस बात बदलता रहा ।
किसी का बार कोई इंसान नहीं उठा सकता यहाँ ।
पर कोख में जिस्म पलकर । आकार बदलता रहा ।
सियासत, बज़ारत, तिज़ारत या फिर कभी हुकूमत ।
औरत बिकती रही चुपचाप । बाज़ार बदलता रहा ।
कब तलक बातों से दिल बहलाओगे " दीपक " तुम भी । 
करार कोई दे ना सका । बस करार बदलता रहा । दीपक शर्मा 
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