Tuesday, 5 June 2012

मेरे सीने में तेरा नाम धडकता है अभी - सुधीर

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है । नहीं ..कभी कभी ही आता है कि - मुझे कविता लिखना क्यों नहीं आता ? तमाम ब्लागर लेखक लेखिकायें क्या मजेदार गीत हैं लिखते । दर्द ए दिल । दास्तान ए मोहब्बत । नगमा प्यार का । इश्क बुखार का । क्या क्या नहीं कहते । चलिये हम भी एक गीत लिखने की कोशिश हैं करते - कजरारे कजरारे तेरे कारे कारे नैना । राजीव जी ! गीत नहीं लिख पाते । अब ऐसा कभी न कहना ।
और अब मिलिये सुधीर जी से -
कि उस बुत के लव चूमने को हर कोई बेताब । होङ थी फ़रिश्तों में उसे गले लगाने की । इन दिनों पलाश सा खिला है चेहरा उसका । कोयल सी कुहक है होठों पर उसके । ये भाव गीत है इनका ? और इनका शुभ नाम है - सुधीर मौर्य " सुधीर " और इनकी Industry है - Engineering और इनका Occupation है - Poet, Writer & Engg और इनकी Location है - Ganj Jalalabad, Unnao, U.P., India सुधीर जी अपने Introduction में कहते हैं - I am an engg & involve in self writing. और इनका Interests है - writing gazals, poem, story & novel और इनका Favourite Music है
- Mukesh, Talat Mahmood और इनकी Favourite Books हैं - Aah, Gita, Lazza, Lams तभी तो सुधीर जी कहते हैं - कुदरत ने जो तूलिका उठायी बुत बनाने को । बनाया न था उसने कभी इस तरह जनाने को । हिरन सी लचक है चाल में उसकी । लगता है जैसे अवतरित हुआ है मधुमास शरीर में उसके और इनके ब्लाग्स हैं - साहित्य नारी दस्तखत । ब्लाग तङाग । कलम से । साँझ । इनके ब्लाग पर जाने हेतु नाम अनुसार क्लिक करें
 और ये हैं सुधीर जी के ब्लाग से कुछ गीत गजल । आप भी रस लीजिये ।
कुदरत ने जो तूलिका उठायी बुत बनाने को । बनाया न था उसने कभी इस तरह जनाने को ।
कि उस बुत के लव चूमने को हर कोई बेताब । होङ थी फ़रिश्तों में उसे गले लगाने की ।
इन दिनों पलाश सा खिला है चेहरा उसका । कोयल सी कुहक है होठों पर उसके ।
झील सी आँखे करती हैं अठखेलियाँ उसकी । खिलने लगी है चन्द्रिमा पूनम की गालों में उसके ।
हिरन सी लचक है चाल में उसकी । लगता है जैसे अवतरित हुआ है मधुमास शरीर में उसके ।
हो न हो चढने लगा प्रीत का रंग किसी का इन दिनों ।
सुधीर मौर्य ।
खुदा की लानत इस खाली आसमान पर । और रात के सितारों पर ।
खुदा की लानत इस रास्ता चलती । और कलकल करती नदी पर ।
खुदा की लानत इन पत्थरों पर । जो राहों की धूल में लिपटे हुए ।
खुदा की लानत इस चूल्हे की आग पर । कि मेरा दिल कच्चा गोश्त है ।
खुदा की लानत वक़्त के कानूनों पर । जो हमारे दर्द को छल जाते हैं ।
अमृता प्रीतम ।
आज की शब तो कोई तौर गुज़र जायगी । रात गहरी है मगर चाँद चमकता है अभी ।
मेरे माथे पे तेरा प्यार दमकता है अभी । मेरी सांसो में तेरा लम्स महकता है अभी ।
मेरे सीने में तेरा नाम धडकता है अभी । जीस्त करने को मेरे पास बहुत कुछ है अभी ।
तेरी आवाज़ का जादू है अभी मेरे लिए । तेरे मलबूस की खुशबु है अभी मेरे लिए ।
तेरी बाहें तेरा पहलु है अभी मेरे लिए । सबसे बढकर मेरी जां ! तू है अभी मेरे लिए ।
जीस्त करने को मेरे पास बहुत कुछ है अभी । आज की शब तो कोई तौर गुज़र जाएगी ।
सबा युनुस ।
मेरे हाथों की लकीरों में खुद को ढूंढ रहा था वो । मुझे खोने के डर से खौफज़दा था वो ।
अपने अश्को को पलकों में छुपाये । अपनी बेबसी पे हँस रहा था वो ।
बिखरे हुए ख्वाबों के टुकड़े बटोर कर । मुझे हिम्मत दे रहा था वो ।
सिसकती आँहों को सीने में दबाये । उम्मीदों के महल खड़े कर रहा था वो ।
अपने जज्बातों से कुछ इस तरह लड़ रहा था वो । कि किस्तों में हँस रहा था ।
और.. किस्तों में रो रहा था वो ।
परवीन शाकिर ।
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