Wednesday, 20 May 2015

चेचक रोग और उपचार

चेचक मानव में पाया जाने वाला एक प्रमुख रोग है । इस रोग से अधिकांशत: छोटे बच्चे ग्रसित होते हैं । यह रोग जब किसी व्यक्ति को होता है । तब इसे ठीक होने में 10 से 15 दिन लग जाते हैं । किन्तु रोग के कारण चेहरे आदि पर जो दाग़ पड़ जाते हैं । उन्हें ठीक होने में लगभग 5 या 6 महीने का समय लग जाता है । यह रोग अधिकतर बसन्त ऋतु या फिर ग्रीष्मकाल में होता है । यदि इस रोग का उपचार जल्दी ही न किया जाए । तो रोग से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है ।
लक्षण - इस रोग के हो जाने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है । बुखार 104 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है । रोगी को बेचैनी होने लगती है । उसे बहुत ज़्यादा प्यास लगती है । और पूरे शरीर में दर्द होने लगता है । हृदय की धड़कन तेज हो जाती है । और साथ में जुकाम भी हो जाता है । 2-3 दिन के बाद बुखार तेज होने लगता है । शरीर पर लाल रंग के दाने निकलने लगते हैं । दानों में पानी जैसा मवाद पैदा हो जाता है । सात दिनों में दाने पकने लगते हैं । जो कि धीरे धीरे सूख जाते हैं । दानों पर खुरण्ट ( पपड़ी ) सी जम जाती है । कुछ दिनों के बाद खुरण्ट तो निकल जाती है । लेकिन उसके दाग़ रह जाते हैं ।
कारण - चेचक के रोग को घरेलू भाषा में ‘माता’ या ‘शीतला’ भी कहते हैं । यह रोग अक्सर उन बच्चों को होता है । जिनके शरीर में शुरू से ही गर्मी अधिक होती है । तथा उनकी उम्र 2 से 4 वर्ष तक की होती है । कभी कभी यह रोग औरतों और बड़ों में भी हो जाता है । इस रोग के फैलने का कारण वायरस ( जीवाणु ) है । इस रोग के जीवाणु थूक, मलमूत्र और नाखूनों आदि में पाये जाते हैं । सूक्ष्म छोटे छोटे जीवाणु हवा में घुल जाते हैं । और श्वसन के समय ये जीवाणु शरीर के अन्दर प्रवेश कर जाते हैं । इस रोग को आयुर्वेद में ‘मसूरिका’ के नाम से जाना जाता है ।
सावधानियाँ - चेचक के रोग से ग्रस्त रोगी के घर वालों को खाना बनाते समय सब्जी आदि में छोंका नहीं लगाना चाहिए ।
दरवाज़े पर और रोगी के बिस्तर के चारो और नीम के पत्तों की टहनी लटका देनी चाहिए ।
ध्यान रखें कि बच्चा शरीर पर आए छालों या फोड़े को खरोंचे नहीं । वरना ये पूरे शरीर पर फैल सकते हैं । व दर्द भी हो सकता है । बच्चे के नाखून छोटे रखें । व फोड़ों को ढंके नहीं ।
रोगी के चारो तरफ साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखें ।
रोगी को जब भी नहलायें । उस पानी में नीम की पत्तियों को उबाले । 
आयुर्वेद में चेचक में नीम से ज़्यादा किसी पर भी भरोसा नहीं किया जाता । 
बच्चे को अन्य लोगों से दूर रखें ।
चेचक के रामबाण घरेलू उपाय - पीपल की 3 या 5 पत्तियां लें । पत्तियों की डंडी तोड़ दें । इन पत्तों को 1 गिलास पानी में उबालें । और एक चौथाई रहने पर इसको गुनगुना ही रोगी को पिलायें । ये प्रयोग 3 से 5 दिन तक हर रोज़ सुबह और शाम को करें । इससे चेचक, टाइफ़ायड और खसरा और आम बुखार में बेहद लाभ मिलता हैं ।
- तुलसी की 12-15 पत्तियों को 3 या 4 काली मिर्च के साथ पीसकर गुनगुने पानी के साथ दिन में 2 बार पिलायें ।
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साभार - एक फ़ेसबुक पोस्ट से ।
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