Wednesday, 20 May 2015

प्रचार या बिक्री षङयन्त्र ?

आईये समाज में फैले कुछ षडयन्त्रों के बारे में जाने कि अर्धसत्य और पूर्णसत्य है क्या ?
ये राय बदल भी सकती है ।

अर्धसत्य - फलां फलां तेल में कोलेस्ट्रोल नहीं होता है ।
पूर्णसत्य -  किसी तेल में कोलेस्ट्रोल नहीं होता । ये केवल यकृत में बनता है ।

अर्धसत्य - सोयाबीन में भरपूर प्रोटीन होता है ।
पूर्णसत्य - सोयाबीन सूअर का आहार है । मनुष्य के खाने लायक नहीं । भारत में अन्न की कमी नहीं है । इसे सूअर आसानी से पचा सकता है, मनुष्य नहीं । जिन देशों में 8-9 महीने ठण्ड रहती है । वहाँ सोयाबीन जैसे आहार चलते हैं ।

अर्धसत्य - घी पचने में भारी होता है ।
पूर्णसत्य - बुढ़ापे में मस्तिष्क आंतों और संधियों ( joints ) में रूखापन आने लगता है । इसलिए घी खाना बहुत जरुरी होता है । और भारत में घी का अर्थ देशी गाय के घी से है ।

अर्धसत्य - घी को खाने से मोटापा बढ़ता है ।
पूर्णसत्य - ( षङयंत्र प्रचार ) ताकि लोग घी खाना बंद कर दें । और अधिक से अधिक पशु मांस की मंडियों तक पहुंचे । जो व्यक्ति पहले पतला हो । और बाद में मोटा हो जाये । वह घी खाने से पतला हो जाता है ।

अर्धसत्य - घी ह्रदय के लिए हानिकारक है ।
पूर्णसत्य - देशी गाय का घी हृदय के लिए अमृत है । पंचगव्य में इसका स्थान है ।

अर्धसत्य - डेयरी उद्योग दुग्ध उद्योग है ।
पूर्णसत्य - डेयरी उद्योग मांस उद्योग है । यहाँ बछड़ों और बैलों को, कमजोर और बीमार गायों को और दूध देना बंद करने पर स्वस्थ गायों को कत्लखानों में भेज दिया जाता है । दूध डेयरी का गौण उत्पाद है ।

अर्धसत्य - आयोडाईज नमक से आयोडीन की कमी पूरी होती है ।
पूर्णसत्य - आयोडाईज नमक का कोई इतिहास नहीं है । ये पश्चिम का कंपनी षडयंत्र है । आयोडाईज नमक में आयोडीन नहीं । पोटेशियम आयोडेत होता है । जो भोजन पकाने पर गर्म करते समय उड़ जाता है । स्वदेशी जागरण मंच के विरोध के फलस्वरूप सन 2000 में भाजपा सरकार ने ये प्रतिबन्ध हटा लिया था । लेकिन कांग्रेस ने सत्ता में आते ही इसे फिर से लगा दिया । ताकि लूट तंत्र चलता रहे । और विदेशी कम्पनियाँ पनपती रहें ।

अर्धसत्य - शक्कर ( चीनी ) का कारखाना ।
पूर्णसत्य - शक्कर ( चीनी ) का कारखाना इस नाम की आड़ में चलने वाला शराब का कारखाना । शक्कर इसका गौण उत्पाद है ।

अर्धसत्य - शक्कर ( चीनी ) सफ़ेद जहर है ।
पूर्णसत्य - रासायनिक प्रक्रिया के कारण कारखानों में बनी सफ़ेद शक्कर ( चीनी ) जहर है । पम्परागत शक्कर एकदम सफ़ेद नहीं होती । थोडा हल्का भूरा रंग लिए होती है ।

अर्धसत्य - फ्रिज में आहार ताज़ा होता है ।
पूर्णसत्य - फ्रिज में आहार ताज़ा दिखता है । पर होता नहीं है । जब फ्रिज का अविष्कार नहीं हुआ था । तो इतनी देर रखे हुए खाने को बासी या सङा हुआ खाना कहते थे ।

अर्धसत्य - चाय से ताजगी आती है ।
पूर्णसत्य - गरम पानी से आती है ताजगी । चाय तो केवल नशा ( निकोटिन ) है ।

अर्धसत्य - एलोपैथी स्वास्थ्य विज्ञान है ।
पूर्णसत्य - एलोपैथी स्वास्थ्य विज्ञान नहीं । चिकित्सा विज्ञान है ।

अर्धसत्य - एलोपैथी विज्ञान ने बहुत तरक्की की है ।
पूर्णसत्य - दवाई कंपनियों ने बहुत तरक्की की है । एलोपैथी में मूल दवाईयां 480-520 के लगभग हैं । जबकि बाज़ार में 1 00 000 से अधिक दवाईयां बिक रही हैं ।

अर्धसत्य - बैक्टीरिया वायरस के कारण रोग होते हैं ।
पूर्णसत्य - शरीर में बैक्टीरिया वायरस के लायक वातावरण तैयार होने पर रोग होते हैं ।

अर्धसत्य - भारत में लोकतंत्र है । जनता के हितों का ध्यान रखने वाली जनता द्वारा चुनी हुई सरकार है ।
पूर्णसत्य - भारत में लोकतंत्र नहीं कंपनी तन्त्र है । बहुत से सांसद, मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी कंपनियों के दलाल हैं । उनकी भी नौकरियां करते हैं । उनके अनुसार नीतियां बनाते हैं । वे जनहित में नहीं कंपनी हित में निर्णय लेते हैं । भोपाल गैस कांड से बड़ा उदहारण क्या हो सकता है । जहाँ एक अपराधी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के आदेशानुसार फरार हो सका लोकतंत्र होता । तो उसे पकड के वापस लेट ना ।

अर्धसत्य - आज के युग में मार्केटिंग का बहुत विकास हो गया है ।
पूर्णसत्य - मार्केटिंग का नहीं ठगी का विकास हो गया है । माल गुणवत्ता के आधार पर नहीं विभिन्न प्रलोभनों व जुए के द्वारा बेचा जाता है । जैसे क्रीम गोरा बनती है भाई । कोई भैंस को गोरा बना के दिखाओ ।

अर्धसत्य - टीवी मनोरंजन के लिए घर घर तक पहुँचाया गया है ।
पूर्णसत्य - जब टीवी नहीं था । तब लोगों का जीवन देखो । और आज देखो । जो आज इंटरनेट पर बैठे सुलभता से जीवन जी रहे हैं । उन्हें अहसास नहीं होगा । कंपनियों का माल बिकवाने और परिवार व्यवस्था को तोड़ने, ईसाईवाद का प्रचार करने के लिए टीवी घर घर तक पहुँचाया जाता है ।

अर्धसत्य - टूथपेस्ट से दांत साफ होते हैं ।
पूर्णसत्य - टूथपेस्ट करने वाले यूरोप में हर 3 में से 1 के दांत ख़राब हैं । दंत मंजन करने से दांत साफ होते हैं । मंजन - मांजना । क्या बर्तन ब्रश से साफ होते हैं ?
मसूड़ों की मालिश करने से दांतों की जड़ें मजबूत भी होती हैं ।

अर्धसत्य - साबुन मैल साफ कर त्वचा की रक्षा करता है ।
पूर्णसत्य - साबुन में स्थित केमिकल ( कास्टिक सोडा, एस.एल.एस. ) और चर्बी त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं । और डाक्टर इसीलिए चर्म रोग होने पर साबुन लगाने से मना करते हैं । साबुन में गौ की चर्बी पाए जाने पर विरोध होने से पहले हिंदुस्तान लीवर हर साबुन में गाय की चर्बी का उपयोग करती थी ।
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साभार - कौशल किशोर जी
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