Friday, 30 September 2011

मेरे बुलाने पर चौंक कर पलटी थी तुम - रचना


आईये  रचना जी के बारे में कुछ जानते हैं -
Ardmore । OK । United States में रहने वाली रचना जी Freelance writer and Poet हैं ।
जन्म 5 Sept । लखनऊ UP । शिक्षा  B Sc, M A ( हिन्दी ) B ed सृजन । कविता । कहानी आदि लिखने की प्रेरणा बाबा स्व रामचरित्र पाण्डेय माँ श्रीमती विद्यावती पिता श्री रमाकांत से मिली । भारत और डैलस ( अमेरिका ) की बहुत सी कवि गोष्ठियों में भाग । और डैलास में मंच संचालन । अभिनय में अनेक पुरस्कार और स्वर्ण पदक । वाद विवाद प्रतियोगिता में पुरस्कार । लोक संगीत । न्रृत्य में पुरुस्कार । रेडियो फन एशिया । सलाम नमस्ते ( डैलस ) मनोरंजन ( फ्लोरिडा ) संगीत ( हियूस्टन ) में कविता पाठ । कृत्या । साहित्य कुञ्ज । अनुभूति । अभिव्यक्ति । सृजन गाथा । लेखनी । रचनाकार । हिंदयुग्म । हिन्दी नेस्ट । गवाक्ष । हिन्दी पुष्प । स्वर्ग विभा । हिन्दी मीडिया । हिन्दी हाइकु । हिन्दी गौरव । लघुकथा डॉट कॉंम इत्यादि में लेख । कहानियाँ । कविताएँ । लघुकथाएँ । बाल कथाएँ प्रकाशित । चन्दनमन । और ‘कुछ ऐसा हो’ संकलनों में हाइकु प्रकाशित । हिन्दयुग्म के 2008 Sept के यूनिपाठक तथा  2008 Dec के यूनिकवि सम्मान से सम्मानित । इनका ब्लाग - मेरी कवितायें
और ये पढिये । इनकी कविता -


ईद मेले में मै । हरी चूड़ियाँ बनके बिका । तुम आयीं । और लाल चूड़ियाँ खरीद कर चली गईं ।
तुमको तो हरा रंग पसंद था न ?
मूँदकर  मेरी आँखे । पूछा था तुमने । बताओ कौन हूँ मै ? उन यादों के पल । आज भी । मेरी अलमारी में सजे हैं । तुम कभी आओ । तो दिखाऊँगा ।
अचानक मेरे बुलाने पर । चौंक कर पलटी थी तुम । और तुम्हारे मेहँदी भरे हाथ । लग गए थे मेरी कमीज़ पर ।
अब हर ईद पर । मैं उसको गले लगाता हूँ आज भी । इनसे गीली मेंहदी की खुशबू आती है ।
बादल  के परदे हटा के । झाँका जो  चाँद ने । मुबारक मुबारक । के शोर से सिमट गया सोचा । निकलता तो रोज ही हूँ पर आज । उसे क्या मालूम कि वो ईद का चाँद है ।
तुमने । उस रोज । मेरे कानों में हौले से कहा था । ईद मुबारक । अब । जब भी देखती हूँ  । ईद का चाँद । खुद ही कह लेती हूँ -  ईद मुबारक ।
मैने अब्बा के आगे बढाया । जो ईदी के लिए हाथ । गर्म मोती की दो बूंदों गिरीं । और हथेली भर गई ।
आज भी हर ईद पर । गीली हो जाती है हथेली ।
सेवईयाँ लाने गया था । बाजार वो । और ब्रेकिंग न्यूज बन गया । अब इस घर में । कभी सेवईंयाँ नहीं बनती ।
सभी विवरण रचना जी के ब्लाग से साभार । ब्लाग पर जाने हेतु क्लिक कीजिये ।
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