Tuesday, 25 February 2014

मृत्यु पर विजय पाने वाला महा मृत्युंजय मंत्र

महा मृत्युञ्जय मंत्र यजुर्वेद के रूद्र अध्याय स्थित 1 मंत्र है । इसमें शिव की स्तुति की गयी है । शिव को मृत्यु को जीतने वाला माना जाता है । मंत्र इस प्रकार है ।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम । 
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ।
शिव को मृत्युंजय के रूप में समर्पित महान मंत्र ऋग्वेद में पाया जाता है । इसे मृत्यु पर विजय पाने वाला महा मृत्युंजय मंत्र कहा जाता है । इस मंत्र के कई नाम और रूप हैं । इसे शिव के उग्र पहलू की ओर संकेत करते हुए रुद्र मंत्र कहा जाता है । शिव के 3 आँखों की ओर इशारा करते हुए त्रयंबकम मंत्र, और इसे कभी कभी मृत संजीवनी मंत्र के रूप में जाना जाता है । क्योंकि यह कठोर तपस्या पूरी करने के बाद पुरातन ऋषि शुक्र को प्रदान की गई " जीवन बहाल " करने वाली विद्या का 1 घटक है । ऋषि मुनियों ने महा मृत्युंजय मंत्र को वेद का ह्रदय कहा है । चिंतन और ध्यान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अनेक मंत्रों में गायत्री मंत्र के साथ इस मंत्र का सर्वोच्च स्थान है ।
महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अर्थ ।
त्रयंबकम = त्रि - नेत्रों वाला ( कर्मकारक )
यजामहे = हम पूजते हैं । सम्मान करते हैं । हमारे श्रद्देय ।
सुगंधिम = मीठी महक वाला । सुगंधित ( कर्मकारक )
पुष्टि = 1 सुपोषित स्थिति । फलने फूलने वाली । समृद्ध जीवन की परिपूर्णता ।

वर्धनम = वह जो पोषण करता है । शक्ति देता है । ( स्वास्थ्य, धन, सुख में ) वृद्धिकारक । जो हर्षित करता है । आनन्दित करता है । और स्वास्थ्य प्रदान करता है । 1 अच्छा माली ।
उर्वारुकम = ककड़ी ( कर्मकारक )
इव = जैसे । इस तरह ।
बंधना = तना ( लौकी का ) ( " तने से " पंचम विभक्ति - वास्तव में समाप्ति -द से अधिक लंबी है । जो संधि के माध्यम से न/अनुस्वार में परिवर्तित होती है )
मृत्युर = मृत्यु से ।
मुक्षिया = हमें स्वतंत्र करें । मुक्ति दें ।
मा = न
अमृतात = अमरता । मोक्ष ।
Acharya Anupam Jolly
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आत्मा की खोज में तत्पर मनुष्य अनंत आत्मा को जान ही लेता है । और जब वह आत्मा को जान लेता है । तो परमात्मा को भी जान लेता है । ईश्वर, परमात्मा, खुदा और आत्मा सब ऊर्जा के भिन्न भिन्न नाम रूप हैं । इन नाम को संसार के मनुष्य जानते, मानते रहते हैं । जबकि ऊर्जा को मूल रूप से देखें । तो जानेगे कि - ऊर्जा का कोई नाम नहीं होता । नाद ब्रम्ह ध्यान योग धाम आश्रम इन्दौर म.प्र.
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विषयों में भटका मन मोरा । कबहु न अघानो ।
मैं मैं करता फिरे रे संतो । मन संसार में भरमायो ।

चंचल मन मेरा चारो जहाँ में फिरे । जब तक पांचों थिर न होवा ।
इन सब मिल मन मेरा ले भागे । दिन रात दुःख भोगा ।
जो बोया है सो काटेगा । इसमें कोई हेर न फेर ।
सब छोड़ हरी चरण में आजा । सब मिटे करम धरम का फेर ।
जो रंग राम नाम संग लागा । और रंग न सुहावा ।
जो हरी नाम रंग लागा । सब छुटे तब सब कुछ पावा । संत रैदास
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लिखा है सबका नसीब उस खुदा ने । हम सब उसकी पनाह में हैं ।
अब जो हो - सो हो । हम सब उसकी निगाह में हैं ।
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ओम हैं होमें नहीं इक शब्द ये ।
ओंकार । रा-रनकार । सो-हम । 
कहो चाहे - अनल हक़ । अनल हक़ । त्तत्वमसि । 
श्वेत केतु मीरा संग चैतन्य देखो । 
वो अब लगे हैं रोने ओम है होमें ।
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खुद ही बने अमीर तू खुद ही रहे गरीब ।
ईश्वर अपने हाथ से, लिखता नही नसीब ।
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वह ऊर्जा भी नहीं । चेतन भी नहीं । बल्कि जो है । सो - है । परम । शाश्वत हाँ ये कहा जा सकता है । प्रथम चेतन फ़िर ऊर्जा रूप भी वही है । वही है सबका - साहेब ।
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Nobody is superior, nobody is inferior, but nobody is equal either. People are simply unique, incomparable.You are you, I am I. I have to contribute my potential to life; you have to contribute your potential to life. I have to discover my own being; you have to discover your own being. OSHO
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Husband asks - Do you know the meaning of WIFE ?
It means - Without Information Fighting  Everytime!
WIFE satys No - it means - With Idiot for Ever
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मकान मालिक - 500  रुपए किराया होगा ।
किरायेदार - ठीक है । लेकिन आपके मकान में तो चूहे नाच रहे हैं ।
मकान मालिक - तो क्या 500  रुपए में मुन्नी और शीला नाचेगी ?
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