Friday, 28 February 2014

एक शख्स हमारी नज़र में है

कृतज्ञ हो । तो सभी आयाम में होश साध सकते हैं । सभी के प्रति कृतज्ञ होओ । क्योंकि सभी तुम्हारे रूपांतरण के लिए अवसर बना रहे हैं । वे भी । जो लगता है कि तुम्हारे लिए अवरोध पैदा कर रहे हैं । वे भी । जिनके बारे में तुम सोचते हो कि - वे तुम्हारे दुश्मन हैं । तुम्हारे मित्र । तुम्हारे दुश्मन । भले लोग और बुरे लोग । अनुकूल माहौल । प्रतिकूल माहौल । सभी मिलकर परिस्थिति निर्मित कर रहे हैं । जिससे तुम रूपांतरित हो सको । और बुद्ध बन सको । सभी के प्रति कृतज्ञ होओ । उनके प्रति जिन्होंने मदद की । उनके प्रति जिन्होंने व्यवधान पैदा किया । उनके प्रति जो खिलाफ रहे । सभी के प्रति कृतज्ञ होओ । क्योंकि ये सब मिलकर ऐसी परिस्थिति पैदा कर रहे हैं । जहां बुद्ध पैदा हो सके । जहां तुम बुद्ध बन सको ।
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नानक ने परमात्मा को गा गाकर पाया l  गीतों से पटा है मार्ग नानक का l  इसलिए नानक की खोज बड़ी भिन्न है l पहली बात समझ लेनी जरुरी है कि नानक ने योग नहीं किया । तप नहीं किया । ध्यान नहीं किया l नानक ने सिर्फ गाया l और गाकर ही पा लिया l लेकिन गाया उन्होंने इतने पूरे प्राण से कि गीत ही ध्यान हो गया । गीत ही योग बन गया । गीत ही तप हो गया l ओशो । बोदा नशा शराब का उतर जाय परभात । नाम खुमारी नानका चङी रहे दिन रात ।
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बहुत समय पहले की बात है । 1 बार 1 गुरुजी गंगा किनारे स्थित किसी गाँव में अपने शिष्यों के साथ स्नान कर रहे थे । तभी 1 राहगीर आया । और उनसे पूछा - महाराज, इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं ? दरअसल मैं अपने मौजूदा निवास स्थान से कहीं और जाना चाहता हूँ ? गुरुजी बोले - जहाँ तुम अभी रहते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं ?
- मत पूछिए महाराज ! वहां तो 1 से 1 कपटी, दुष्ट और बुरे लोग बसे हुए हैं । राहगीर बोला ।
गुरुजी बोले - इस गाँव में भी बिलकुल उसी तरह के लोग रहते हैं । कपटी, दुष्ट, बुरे । और इतना सुनकर राहगीर आगे बढ़ गया ।
कुछ समय बाद 1 दूसरा राहगीर वहां से गुजरा । उसने भी गुरुजी से वही प्रश्न पूछा - मुझे किसी नयी जगह जाना है । क्या आप बता सकते हैं कि इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं ?
- जहाँ तुम अभी निवास करते हो । वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं ?  गुरुजी ने इस राहगीर से भी वही प्रश्न पूछा ।
- जी वहां तो बड़े सभ्य, सुलझे और अच्छे लोग रहते हैं । राहगीर बोला ।
- तुम्हे बिलकुल उसी प्रकार के लोग यहाँ भी मिलेंगे । सभ्य, सुलझे और अच्छे । गुरुजी ने अपनी बात पूर्ण की । और दैनिक कार्यों में लग गए । पर उनके शिष्य ये सब देख रहे थे । और राहगीर के जाते ही उन्होंने पूछा - क्षमा कीजियेगा गुरुजी । पर आपने दोनों राहगीरों को 1 ही स्थान के बारे में अलग अलग बातें क्यों बतायी ?
गुरुजी गंभीरता से बोले - शिष्यों आमतौर पर हम चीजों को वैसे नहीं दखते । जैसी वे हैं । बल्कि उन्हें हम ऐसे देखते हैं । जैसे कि हम खुद हैं । हर जगह हर प्रकार के लोग होते हैं । यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस तरह के लोगों को देखना चाहते हैं ।
शिष्य उनकी बात समझ चुके थे । और आगे से उन्होंने जीवन में सिर्फ अच्छाईयों पर ही ध्यान केन्द्रित करने का निश्चय किया । कोई न काहू सुख दुख कर दाता । निज कर कर्म भोग सब भ्राता ।
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मंदिर न मैकदे में न मस्जिद न घर में है । 
जो शख्स मुद्द्तों से हमारी नज़र में है । 

हालांकि अब सफ़र की थकन भी उतर गई । 
लेकिन हमारा ज़ेहन अभी तक सफ़र में है । 
उड़ते परिंदे देखे तो एहसास ये हुआ । 
कितनी कमी अभी भी हमारे सफ़र में है । 
पत्तों को छोड़ देता है अक्सर खिज़ां के वक़्त । 
खुदग़रज़ी ही कुछ ऐसी यहाँ हर शजर में है । 
तख्लीक़ जिसने देखी वो दीवाना हो गया । 
जादू ज़रूर कोई तुम्हारे हुनर में है । 
कोशिश के मोजिज़ा है तमाशा के हादसा । 
तेरा जो ज़िक्र रोज़ की ताज़ा खबर में है । 
बातें तरह तरह की बनाने लगे हैं लोग । 
जिस दिन से एक शख्स हमारी नज़र में है ।
Eva Hollyer, American  1965 - 1948 
THE NOVEL 
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It is becoming more and more difficult to understand people, because such thick, dense indifference surrounds everybody that even if you shout you can’t be heard, or they hear something which you have not said at all. They hear that which they want to hear or they hear that which they CAN hear. They hear not what is said but what their mind interprets. OSHO
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Hidden inside a woman in the every woman but often  people see the outside woman
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Who i am ?  I am not body I have a body & i live in body . I am not mind i am beyond the mind . I am consciousness ( soul ) Know this understand this Realize this from deeper meditation or awareness & that is self realization 
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MASTURBATION WITH MEDITATION
Telling to a fourteen or fifteen-year-young boy that celibacy is a virtue, that he has to remain celibate until he has come from the university and he gets married, you are simply asking the impossible.
At the age of eighteen man has the most sexual power. After eighteen he starts declining. It is at the age of eighteen that he comes to the peak of his sexual energy, and he can have tremendously significant orgasms. And he is capable of having three, four, five orgasms in one night. 
When he was able to have orgasms, he was told to remain celibate. He repressed his energy, or he became a pervert. He became a homosexual or he started masturbating.
But in all the countries even doctors go on telling people that masturbation will make you crazy, will make you mad. This is sheer nonsense. 
In fact, to get rid of sexual energy which is too much, masturbation is the most hygienic method. 
And at the age of eighteen, if you can be taught masturbation with meditation, your whole life will be a totally different life. Not a life of misery, suffering, sadness, frustration, but a life of sheer dance and song.
That's what I will teach people. When they are at the peak of their sexual energy, that is the moment when they can have orgasm very easily. And now the Pill is available, so there is no problem. Boys and girls should be living in the same hostels. They should be making love. The fear of getting pregnant is no more there. Now love is, for the first time, pure fun. And joined with meditation it becomes sacred fun.
No prayer, no church-going can help you to understand what I am saying. No HOLY BIBLE can give you the insight.
But if the girl is not available, then help people with masturbation. Teach them how you have to be meditative. And when you come to a peak and you explode into an orgasmic joy, watch. Be alert. 
This is absolutely medical, scientific, and to me, spiritual. OSHO
STRUGGLING FOR THE NEW MAN
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In essence, if we want to direct our lives, we must take control of our consistent actions. It's not what we do once in a while that shapes our lives, but what we do consistently. 
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˚˚ ˚⁀˚⋆.‿.   Love  
˚⋆.‿.⋆˚⁀˚ (¯`v´¯) ˚⁀˚⋆.‿.⋆˚
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┊ | ┊ | ┊ | ┊ | ┊ HAPPY FRIDAY ┊ | ┊ | ┊ | ┊ | ┊
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We learn .... from our mistakes ....
Each mistake is like a lesson of life 
Sometimes we could forget these lessons of life  
Do not could be life without mistakes ! Sure, Sure 
0,00000 Killers 
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