Monday, 10 September 2012

गलियों में शोर मचा वो मेरी दुल्हन बनी


आईये ब्लागर परिचय श्रंखला में आज आपका परिचय युवा ब्लागर श्री अरुन शर्मा से कराते हैं ।
दास्तान ए दिल । ये दुनियाँ है दिलवालों की..जिस ब्लाग का नाम ही ऐसा रोमांटिक है । तो वह प्रेम । विरहा । मधुर मिलन । यादें । तनहाई । तङप आदि के प्रेम अंगों और भावनात्मक रंगों से सराबोर क्यों न होगा । अरुन शर्मा ऐसे ही भावुक प्रेमी युवा की छवि को बखूबी शब्दों के द्वारा रेखांकित करते हैं । इनकी कविताओं में शिल्प और शैली के बजाय भावों की प्रधानता अधिक है । हर युवा अपनी जिन्दगी में प्रेम करता है । और  फ़िर उसके दिल पर इस प्रेम की दास्तां किस तरह की धूप छांव बनाती है । इसका आपको सहज अहसास होगा । अरुन अपने परिचय में कहते हैं -  मैं एक साधारण व्यक्ति हूँ । जीवन की इस नौका के साथ साथ चलता हुआ

जिंदगी को सुख दुःख के साथ जीने का प्रयत्न करता हूँ । चार दिन की जिंदगी में किसी का भी दिल न दुखाने की कोशिश करता हूँ । मुझे कवितायें । गज़लें । गीत पढ़ने और लिखने का शौक है । जो कुछ मन में आता है । उससे कागज पर उतार देता हूँ । और फिर ब्लाग के जरिये सबके साथ बांटता हूँ । और ये है । इनका ब्लाग - दास्तान ए दिल ये दुनियाँ है दिलवालों की । इनके ब्लाग पर जाने हेतु क्लिक करें ।
और ये हैं । इनके ब्लाग से कुछ रचनायें -
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मैं आँखें भर भर रोता हूँ
सोयी सोयी रातों में मैं जागा जागा होता हूँ । पल पल तेरी यादों में मैं आँखें भर भर रोता हूँ ।
टूटा टूटा रहता हूँ खोई खोई सी उलझन में । दिल के कोने कोने में मैं गम ही गम बस बोता हूँ ।

चाहत की गहराई ना मैं समझा ना मैं जाना । छोड़ा फूलों नें पत्थर कर काटों से मैं जोता हूँ ।
जीता हूँ मैं मरता हूँ तेरे ख्यालों में अक्सर । दर दर मैं इस दुनिया में जख्मों को लेकर ढोता हूँ ।
मुश्किल है मुश्किल है इन हालातों में मेरा जीना । साँसों की डोरी तोड़ी है आखिर अब मैं सोता हूँ ।
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खाल ओढ़े मानवों का आ गया शैतान है । अजनबी पर ना भरोसा कर अभी सुनसान है ।
लूट कर सब चल बसेगा साथ जो सामान है ।
पूंछता बेटा नहीं अब हाल अपने बाप का । यह हमारे वक़्त की सबसे सही पहचान है ।

शोर गलियों में मचा है वो बनी दुल्हन मेरी । प्यार मेरा आज देखो चढ़ रहा परवान है ।
इश्क से ये दिल हमेशा यार क्यूँ डरता रहा । इश्क तुमको पा लगा मुझको बड़ा आसान है ।
ताड़ते इज्ज़त घरों की फिर दुशासन रूप में । खाल ओढ़े मानवों का आ गया शैतान है ।
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ना करो प्यार किसी को नाप तौल कर । लुटा दो जान भी अपनी दिल खोल कर ।
मिटा के खुद को इस तरह बर्बाद करो । दो लफ्ज प्यार के प्यार में बोल कर ।
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प्यार को कफ़न बना लिया ।
तुझे प्यार करने का जो मन बना लिया । जमाने को कसम से दुश्मन बना लिया ।
कौन मार दे मुझे ये तक खबर नहीं । डर से घबराया खुद का बदन बना लिया । 
समझ के फूल चुने कांटे इतने । कि दिल में जख्मो का एक चमन बना लिया । 
बुझती चिंगारी ने जलाया घर मेरा । तुझे सपने में जो दुल्हन बना लिया ।

पी पी के बहते अश्कों का पानी । कुछ दिन जीने का साधन बना लिया ।
लगी ठोकर जब तो पता चला कि । मैंने पत्थरों से अपना आँगन बना लिया ।
बहते लहू ही इस बात का सबुत है । तन को जख्मों का उत्पादन बना लिया । 
पास जो भी था लुटा कर मैंने । दिल की बीमारी को ही धन बना लिया । 
कोशिशें नाकाम रही तुझे भुलाने की । जहन में यादों का यूँ बंधन बना लिया ।
खुदा माना तेरे प्यार को जिंदगी भर । मरते वक्त प्यार को कफ़न बना लिया ।
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बेचैन मेरे दिल को, आराम चाहिए ।
बेचैन मेरे दिल को आराम चाहिए । तरसी निगाहों को भी पैगाम चाहिए ।

हालात हैं नाजुक है गम का सहारा । खामोश होंठों को थोडा जाम चाहिए । 
मुझको उमृ भर के लिए हासिल दर्द है । नमकीन अश्कों को घर में काम चाहिए ।
मदहोश कर पहले जख्मों से नवाजा । दीवानगी का बाकी अब अंजाम चाहिए ।
हर बार तूने तोडा दिल का भरोसा । अब और कुछ भी करने का दाम चाहिए ।
- सभी जानकारी और रचनायें साभार अरुन शर्मा के ब्लाग - दीवाने दिल ये दुनियाँ है दिलवालों की से । इस ब्लाग पर जाने हेतु इसी लाइन पर क्लिक करें ।
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