Sunday 13 March 2011

A TRIP TO ईश्वरलोक - कपिल गर्ग ( परिचय पोस्ट )

I am an atheist , pagan and just believe in myself nothing else
**** एक युवा ब्लागर के रूप में कपिल जी मुझे काफ़ी पसन्द है । हालांकि ये एकदम विपरीत बात है । कपिल जी ईश्वरीय सत्ता को नहीं मानते । जबकि मैं तो संतमत का साधक या साधु ही हूँ । फ़िर भी कपिल जी के भोले और निष्कपट विचार मुझे काफ़ी अच्छे लगते हैं । आज काफ़ी दिनों बाद कपिल जी के ब्लाग पर गया । तो देखा कि उन्होंने काफ़ी दिनों से कुछ नया नहीं लिखा था । खैर..चलिये । उनकी एक पुरानी रचना । और उनका परिचय लिंक सहित..राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ ।

A TRIP TO ईश्वरलोक
" बेटा ध्यान से जाना । " जैसे ही ट्रेन चली मम्मी ने हाथ हिलाते हुए कहा ।
खिड़की से मैंने भी मम्मी को bye कहा । और थोड़ी ही देर में ट्रेन ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली । छुट्टी के दिन थे । तो मैं अपनी दीदी से मिलने दिल्ली जा रहा था ।

अगले स्टेशन पर ट्रेन रुकी । तो एक बाबा मेरी सामने वाली सीट पर बैठे । उनके लम्बे सफेद बाल । लम्बी सफेद दाढ़ी । माथे पर तिलक लगा हुआ था । शरीर पर उन्होंने सिर्फ एक धोती और जनेऊ पहना हुआ था । सामान के नाम पर उनके पास सिर्फ एक पोटली और हाथ में रामायण पकड़ी हुई थी । यानी के पूरे साधू-संतों वाली वेशभूषा ।

मैं काफी बातूनी और जिज्ञासु किस्म का इंसान हूँ । तो सोच रहा था कि उंनसे बातचीत कैसे शुरू करूँ ?
फ़िर चुप्पी तोड़ते हुए मैंने कहा , " बाबा मन में एक प्रश्न घूम रहा है । आज्ञा हो तो पूछ सकता हूँ ? "
" O sure..anytime ! " बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा ।


उनके मुख से अंग्रेजी सुनकर थोड़ा अचंभित जरुर हुआ । पर यह सोच करके शायद वो थोडा पढ़े-लिखे हो । मैंने अपना प्रश्न पूछा , " बाबा एक तो आप कहते हो कि भगवान हर जगह है । फिर आप भगवान की पूजा करने मंदिर ही क्यों जाते हो ?
" हा हा हा । " बाबा पहले तो थोड़ा हँसे । फिर थोड़ा सोचकर उन्होंने कहा , " इस प्रश्न का जवाब मैं एक प्र्श्न के रूप में ही देना चाहूँगा । "
" जैसी आपकी इच्छा । " मैंने कहा ।
" Air is everywhere so why you use fan to feel it ? " बाबा ने पूछा ।
इस प्रश्न ने मुझे काफी असमंजस की स्थिति में डाल दिया ।
" बाबा मैं आज तक समझ नहीं पाया कि भगवान सच में है भी कि नहीं ? I'm not sure about the existence of God । इसलिए मैंने आपसे वो प्रश्न पूछा था । " मैंने कहा ।
" बेटा भगवान को तो मैं भी नहीं मानता । I'm an atheist (नास्तिक ) । " बाबा ने जवाब दिया ।
"तो फिर यह वेशभूषा ? यह रामायण ? यह सब क्यों ?" मैंने उत्सुकतावश पूछा ।
" There's a reason behind all this " उन्होंने कहा ।
" क्या reason है sir ? " पता नहीं मैं क्यों उन्हें बाबा कि जगह sir कहने लगा ।

थोड़ा सोचने के बाद बाबा ने कहा , " पहले मैं बताता हूँ कि हम मंदिर क्यों जाते हैं । suppose मैं आपको एक अच्छी सी story सुनाता हूँ । जिसका बहुत ही अच्छा moral है । यानी कि उससे बहुत अच्छी शिक्षा मिलती है । पर वो story तो आप हफ्ता-दस दिन में भूल जाओगे । "
मैंने हाँ में सिर हिलाया ।
" लेकिन अगर मैं कुछ ऐसा करूँ । जिससे वो story आपको time to time याद आती रहे ? तो वैसे ही रामायण महाभारत काफी अच्छी stories है । जिससे कि काफी अच्छी शिक्षा मिलती है । जैसे कि धर्म के लिए लड़ना । सत्य की असत्य पर जीत । गीता का ज्ञान आदि । तो यह स्टोरी लोगों को याद कराने के लिए रामायण, महाभारत के characters ( राम , लक्ष्मण ) जगह-जगह स्थापित किये गये । जिनको देखकर हमे वो story याद आ जाये । और story में छुपी शिक्षा को हम न भूलें । और उन बातों को अपने जीवन में implement करके अच्छे इंसान बने । " बाबा ने कहा ।

बाबा कि बातें सुनने में तो काफी impressive लगी । पूछने पर पता चला कि वो pune university में physics के professor हैं ।

उत्सुकतावश मैंने एक और प्रश्न पूछा , " अच्छा sir मंदिर तो ठीक है । लेकिन हम ये हवन वगैरह क्यों करते हैं ? उसमे तो इन मूर्तियों का कोई लेना देना नहीं ।" क्रमश : (to be continue...) BLOG.. Is it INDIA  Junk Stuffs from my mind
साभार श्री कपिल गर्ग जी के ब्लाग..इज इट इंडिया से । आपका बेहद आभार कपिल जी

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