Tuesday, 15 March 2011

i m mechanical engineer अनूप जोशी । ब्लाग..कशमकश । परिचय पोस्ट ।

जब मैंने नयी नयी ब्लागिंग शुरू की थी । लगभग उसी समय अनूप जोशी जी से मेरा परिचय हो गया था । अनूप जी की रचनाओं में समाज की विसंगतियों अव्यवस्था ऊँचनीच भेदभाव आदि तमाम बुराईयों के प्रति इंसानियत के दृष्टिकोण से । इंसानियत के पैमाने से..एक आक्रोशित युवा की झलक थी । उन्हें भगवान से भी बहुत शिकायत थी । और इस बात से होना ये चाहिये था कि मेरा उनसे प्रेमभाव न होता । लेकिन इसके विपरीत मैं उनके आक्रोश को । और अनूप जी मेरे टेक्नीकल भक्तियोग लेखन को पसन्द करते थे । खैर ..अनूप जी पिछले 11 अक्टूबर को " पापा " बने हैं । उन्हें इसकी बहुत बहुत बधाई के साथ । इस परिचय पोस्ट में उनकी तीन रचनायें पढिये ।
पापा..मैं पापा बन गया ।
11 अक्टूबर की रात में । कोई नहीं था । साथ में ।
अचानक । बीबी का फ़ोन आया । फ़ोन में खबर सुनी तो । मैं घबराया ।
पत्नी को । पेट में दर्द सता रहा था । और मैं ऑफिस में था । इसलिए घबरा रहा था ।
पत्नी के साथ कोई नहीं था । क्योंकि । डिलीवरी डेट । 2 नवम्बर की थी ।
और काफी दिन पहले । दर्द हो रहा था । ये बात बहुत भयंकर थी ।
मैं कमरे में जाने को तुरंत निकला । कठोर दिल मेरा । मोम जैसा पिघला ।
कुछ कोस की दूरी मुझे । कई मील की लग रही थी ।
कई कुछ गलत न हो जाये । ये भावना अन्दर चुभ रही थी ।
घर पहुँचते ही मैं । पत्नी को लेकर । अस्पताल गया ।
डॉक्टर के कमरे में जाते-जाते । मेरी आँखों में आंसू का सैलाब बहा ।
फिर अपने आपको । संभाल कर । डॉक्टर की बात को सुना ।
वो बोली । आपके होने वाले बच्चे के लिए । बिधाता ने । आज का दिन है चुना ।
फिर इन्तजार करते-करते । वो घडी आई ।
सबसे पहले नर्स बाहर आकर । मुझे देख मुस्कराई ।
भगवान के द्वारा । हमें  भेजा उपहार । बच्चे के रूप में डॉक्टर । बाहर लायी ।
मेरे हाथ में पकड़ा कर बोली । बधाई हो बधाई ।
मेरी आँखे खुशी से छलक आई ।
आज आपसे मैंने । अपनी । उस दिन की । बात की है ।
और अपनी पत्नी अंजलि को । धन्यबाद देने के लिए । ये कविता सौगात दी है ।


खुमार
 कुछ नया करना चाहते हैं हम । पुराना हटाकर ।
84 करोड़ देवता तो याद नहीं । ढोंगी बाबा की तस्वीर लगाते हैं । पूजा में सटाकर।
पुण्य कमा लेते हैं । अंधे व्यक्ति को सड़क पार कराकर ।
पर बजट बिगड़ जाता है । माँ के चश्मे का बिल भराकर ।
माँ के हाथ का खाना खाने में हीख इन्हें आती है ।
और बासी बर्गर पिज्जा देखकर ही भूख इन्हें सताती है ।
बगल के किसन चाचा की दूकान जाने में शर्म इन्हें आती है ।
और मल्टीप्लेक्स में अपनी चोरों के जैंसे जांच कराकर महंगा खरीदने में कोई आफत नहीं आती है ।
कुएं के पानी को गन्दा कहते हैं ।
और जो पिए रसायन युक्त मिनरल वाटर उसे बन्दा कहते है ।
घरवालों के लिए टाइम नहीं । पर अमेरिका में चैटिंग से बिना देखे दोस्त की सुध लेते है ।
भुज के भूकंप में सिर्फ अफ़सोस और शाहरुख की अमेरिका में चेकिंग में दुःख लेते है ।
घर के बने खाकी सूती कपडे ख़राब । और ब्रैंड सही हैं ।
लडकियों के 10 बॉयफ्रेंड हैं । टोकने में कहती है । यही ट्रेंड है ।
क्या लिखे जोशी  ( मैं ) पुराना मिटाकर ।
कुछ नया करना चाहते है हम । पुराना हटाकर ।


बिभूति नारायण राय ने । " छिनाल " शब्द का । प्रयोग कर दिया । और रातों रात ।
अपने आपको । प्रसिद्ध कर दिया । पहली बार टीवी में । राहुल महाजन नहीं बल्कि ।
साहित्य में चर्चा हो रही थी । कुछ महिलाएं ।  न्यूज़ चैनेल में रो रही थी ।
कि इस राय ने । बहुत घृणित काम किया है । अपने एक लेख में । औरतों को एक ।
नया नाम दिया है । हमने सोचा लो । एक छोटे से शब्द ने । राय को काबिल बना दिया ।
अक्ष के छितिज को । साहिल बना दिया । अब अगर प्रसिद्ध होना है । तो तुम गालियाँ लिखो ।
और जितना चाहते हो उतना । साहित्य के बाज़ार में बिको । पर भाई हम चांसलर नहीं है ।
जो किसी पत्रिका में । लेख लिख सके । और ना ही ब्लागस्पाट में । मेरे इतने पढने वाले हैं ।
जो हम भी । चर्चामंच में दिख सके । हमें तो कमेन्ट भी तब मिलते हैं जब । हम दूसरो को दे आते है
और क्या पता वो भी ? हमारा बदला चुकाने को । बिना पढ़े " बहुत सुन्दर " । लिखकर चले जातें हैं ।
Anoop Joshi । Industry । Engineering । Occupation । Private । Location । dehradun । uttarakhand । India ।
साभार श्री अनूप जोशी जी के ब्लाग कशमकश से । आपका बहुत बहुत धन्यवाद अनूप जी
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